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समस्तीपुर में रबी गेहूं फसल कटनी प्रयोग का जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, प्रति हेक्टेयर 54 क्विंटल उपज का अनुमान

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समस्तीपुर के धुरलख पंचायत में बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत रबी गेहूं फसल कटनी प्रयोग का जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने निरीक्षण किया। लगभग 54 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज का अनुमान लगाया गया।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले में कृषि उत्पादन और फसल आकलन की प्रक्रिया को सटीक एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आज एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई की गई। बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत रबी मौसम की गेहूं फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण जिला पदाधिकारी रोशन कुशवाहा द्वारा किया गया। यह निरीक्षण समस्तीपुर प्रखंड के धुरलख पंचायत, मौजा धुरलख, थाना संख्या 186 के अंतर्गत खेसरा संख्या 1125 में संपन्न हुआ, जहां निर्धारित मानकों के अनुसार फसल कटनी प्रयोग को अंजाम दिया गया।इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने स्वयं स्थल पर पहुंचकर पूरे प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा की और यह सुनिश्चित किया कि फसल कटनी प्रयोग निर्धारित वैज्ञानिक और प्रशासनिक मानकों के अनुसार किया जा रहा है। फसल सहायता योजना के तहत इस तरह के प्रयोग का उद्देश्य किसानों की वास्तविक उपज का आकलन करना होता है, ताकि भविष्य में उन्हें उचित लाभ और सहायता राशि प्रदान की जा सके।

कटनी प्रयोग 10x5 मीटर के निर्धारित क्षेत्र में किया गया, जिसमें गेहूं की कटाई के बाद प्राप्त दाने का वजन 27.790 किलोग्राम दर्ज किया गया। इस आधार पर कृषि विभाग द्वारा प्रारंभिक आकलन में लगभग 54 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज दर का अनुमान लगाया गया है, जो क्षेत्र में अच्छी फसल उत्पादन स्थिति को दर्शाता है।

निरीक्षण के दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अशोक कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी सुमित सौरभ, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी प्रवीण कुमार झा, प्रखंड विकास पदाधिकारी शुभ प्रभात, प्रखंड कृषि पदाधिकारी कृष्ण मुरारी सिन्हा, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी रितेश कुमार, कृषि समन्वयक हरिदर्शन चौधरी, किसान सलाहकार विपिन कुमार महतो एवं धिरेन्द्र कुमार सहित कई अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। साथ ही स्थानीय किसान भी इस प्रक्रिया के प्रत्यक्ष साक्षी बने।

अधिकारियों ने बताया कि फसल कटनी प्रयोग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी भी क्षेत्र में फसल की वास्तविक उपज का सटीक अनुमान लगाया जाता है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आती है, बल्कि किसानों को उनकी वास्तविक उत्पादकता के आधार पर लाभ देने में भी सहायता मिलती है।

जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े आंकड़े ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं, इसलिए इनकी सटीकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि फसल सहायता योजना का लाभ वास्तविक किसानों तक सही तरीके से पहुंचे, यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने किसानों से भी बातचीत की और उनकी समस्याओं एवं फसल उत्पादन से जुड़ी स्थिति की जानकारी ली। किसानों ने बताया कि इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने के कारण गेहूं की फसल अच्छी हुई है, जिससे उत्पादन में सुधार की उम्मीद है।

इस निरीक्षण के बाद कृषि विभाग ने कहा कि प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आगे की रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे राज्य स्तर पर भेजा जाएगा। यह रिपोर्ट भविष्य की कृषि नीतियों और सहायता योजनाओं के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस प्रकार यह फसल कटनी प्रयोग न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी, बल्कि यह ग्रामीण कृषि व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी साबित हुआ।

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